Agriculture of INDIA भारत की कृषि


भारत की 68 प्रतिशत जनता ग्रामीण इलाकों में निवास करती है।इस 68 प्रतिशत जनता का जीविकोपार्जन का माध्यम येन-केन प्रकारेण कृषि ही है।भारत की 1600 लाख हेक्टेयर कुल उपजाऊ भूमि में से 826 लाख हेक्टेयर भूमि पर ही कृषि होती है।भारत की 874 लाख हेक्टेयर बुवाई योग्य भूमि बंजर पडी हुई है।भारत की सम्पूर्ण कृषि विकेंद्रीकृत है। अर्थात, भारत का 90 प्रतिशत भूस्वामी अपनी जमीन पर खेती करने के लिए अपने ही क्षेत्र के किसी जरूरतमंद को या तो पाणत (आधे बट पर) पर या लीज पर दे देता है। यह जरूरतमंद इंसान पाणत या लीज पर ली गयी इस भूमि पर बहुत ही सहज और साधारण तरीके से खेती-बाड़ी करता है। इस प्रकार की खेती से उसे अपना पेट भरने तक की व्यवस्था भी मुश्किल से हो पाती है, आय की बात तो बहुत दूर रहती है।भारत की केवल 305.6 लाख हेटेयर भूमि पर ही सिंचाई की व्यवस्था है।भारत की प्रति हेक्टेयर भूमि से औसतन 2200 किलोग्राम अनाज का उत्पादन होता हैविकसित देशों में यह 6500 किलोग्राम से लेकर 8000 किलोग्राम तक का है।भारत की कृषि में विज्ञान व तकनीकि के विभिन्न अनुप्रयोगों का प्रयोग बहुत ही सीमित है।भारत में आवागमन की व्यवस्था का स्तर विकसित देशों की आवागमन व्यवस्था का 15 प्रतिशत तक का भी नहीं है ।कई बार तो बाढ़, सूखे तथा उचित भंडारण, आवागमन व खुरदरे बाजार की व्यवस्था न होने की वजह से किसान की फसल पानी के भाव तथा पूरी तरह से बेकार भी हो जाती रही है।भारतीय किसान को उसके उत्पाद की कीमत औसतन 12 रूपये तक ही मिल पाती है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर उसी उत्पाद को बाजार से 100 रूपये में खरीदता है। विकसित देशों में, किसान को अपने उत्पाद की कीमत 65 से 75 रूपये तक मिल जाती है, बाद में यदि उसको जरूरत पड़ती है तो यही वस्तु वह 100 रूपये में खरीदता है। 1.स्थिर एवं विश्वसनीय सिंचाई;2.उचित गुणवत्ता के बीज;3. उचित गुणवत्ता के खाद;4.फसल की कटाई;5. भंडारण,6. यातायात व सड़कें;7. बाजार;8. तैयार माल की कीमत; और सबसे महत्वपूर्ण,9. प्रबंधन।

भारत की कृषि के नौ मुख्य स्तम्भ हैं: -

वर्तमान में, भारत की कृषि के इन नौ स्तम्भों के स्तर के मुताबिक़; कृषि व इसके सहयोगियों से राष्ट्र की सकल आय में योगदान, मात्र 18,150 अरब रूपये के बराबर का रहा।भारत की कृषि के इन 9 स्तम्भों के स्तर को उत्कृष्ठता के शीर्ष तक पहुँचना है। भारत की 1600 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि का केन्द्रीयकरण होना है। यह केन्द्रीयकरण इस प्रकार से होना है कि इस पर स्वामित्व तो सम्बंधित भू-स्वामियों का ही रहेगा, लेकिन इस जमीन को प्रतिवर्ष स्वदेशी कम्पनीयों द्वारा या सरकार द्वारा लीज पर ले लिया जाना होगा। इससे भू-स्वामियों को गुणात्मक रूप से लाभ होगा। इस प्रकार का केन्द्रीयकरण भू-स्वामियों को भी स्वीकार्य होगा। और, ऐसा तभी संभव है जब भारत की जनता भारत के सन्दर्भ में इन हकीकतों से रूबरू हो सकेगी !इस महान लोकतांत्रिक देश में ऐसा हो पाया तो ही; भारत की यही कृषि व इसके सहयोगी, भारत की सकल आय में, सालाना, 21 लाख अरब रूपये के बराबर का योगदान करने लगेंगे।


  • Facebook
  • Twitter
  • YouTube
  • Instagram

Contact Us

Akshvi AWARE INDIA

C-199/A, 80 feet road

Mahesh Nagar

Jaipur, Rajasthan

302015

    

© 2023 Akshvi AWARE

© 2023 INDnext, Inc. All Rights Reserved.

Conditions of Use | Privacy Policy